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गणित (Mathematics) के Complete Notes

गणित एक ऐसा विषय है जिसमें संख्याओं, मात्राओं, आकृतियों, माप, परिवर्तन और उनके बीच संबंधों का अध्ययन किया जाता है। दैनिक जीवन से लेकर विज्ञान, इंजीनियरिंग, अर्थव्यवस्था और प्रतियोगी परीक्षाओं तक गणित का महत्वपूर्ण स्थान है। SSC, Railway, Banking, UPSC, State PSC, Police और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में गणित से संबंधित प्रश्न बड़ी संख्या में पूछे जाते हैं।

 

गणित को समझने के लिए केवल सूत्र याद करना पर्याप्त नहीं है। प्रश्न को समझकर सही सूत्र का प्रयोग करना और गणना को तेजी से पूरा करना भी आवश्यक है। इस नोट्स में गणित के प्रमुख अध्यायों को आसान भाषा में समझाया गया है।

 


 

 

1. संख्या पद्धति (Number System)

 

संख्या पद्धति गणित का आधार है। संख्याओं को उनके गुणों के आधार पर अलग-अलग वर्गों में बाँटा जाता है।

 

प्राकृतिक संख्याएँ

 

1, 2, 3, 4, 5, 6… को प्राकृतिक संख्याएँ कहते हैं।

 

पूर्ण संख्याएँ

 

0, 1, 2, 3, 4, 5… पूर्ण संख्याएँ कहलाती हैं।

 

पूर्णांक

 

…, -3, -2, -1, 0, 1, 2, 3… पूर्णांक कहलाते हैं।

 

परिमेय संख्याएँ

 

जिन संख्याओं को p/q के रूप में लिखा जा सकता है, जहाँ q ≠ 0 हो, उन्हें परिमेय संख्या कहते हैं।

 

उदाहरण: 1/2, 3/4, 5/7

 

अपरिमेय संख्याएँ

 

जिन्हें p/q के रूप में नहीं लिखा जा सकता, वे अपरिमेय संख्याएँ हैं।

 

उदाहरण: √2, √3, π

 

अभाज्य संख्या

 

जिस संख्या के केवल दो गुणनखंड हों—1 और स्वयं संख्या—उसे अभाज्य संख्या कहते हैं।

 

उदाहरण: 2, 3, 5, 7, 11, 13

 

ध्यान रखें कि 2 सबसे छोटी और एकमात्र सम अभाज्य संख्या है।

 


 

 

2. विभाज्यता के नियम

 

विभाज्यता के नियम बड़ी संख्याओं की गणना को आसान बनाते हैं।

 

2 से विभाज्यता

 

यदि संख्या का अंतिम अंक 0, 2, 4, 6 या 8 हो तो संख्या 2 से विभाज्य है।

 

3 से विभाज्यता

 

यदि अंकों का योग 3 से विभाज्य हो तो पूरी संख्या 3 से विभाज्य होगी।

 

उदाहरण: 123 → 1+2+3 = 6, इसलिए 123, 3 से विभाज्य है।

 

5 से विभाज्यता

 

अंतिम अंक 0 या 5 होना चाहिए।

 

9 से विभाज्यता

 

अंकों का योग 9 से विभाज्य होना चाहिए।

 

10 से विभाज्यता

 

अंतिम अंक 0 होना चाहिए।

 


 

 

3. महत्तम समापवर्तक और लघुत्तम समापवर्त्य

 

HCF

 

दो या अधिक संख्याओं का सबसे बड़ा समान गुणनखंड HCF कहलाता है।

 

LCM

 

दो या अधिक संख्याओं का सबसे छोटा समान गुणज LCM कहलाता है।

 

दो संख्याओं के लिए:

 

HCF × LCM = दोनों संख्याओं का गुणनफल

 

उदाहरण:

 

12 और 18 का HCF = 6

 

LCM = 36

 

इसलिए:

 

6 × 36 = 216

 

और 12 × 18 = 216

 


 

 

4. भिन्न (Fraction)

 

भिन्न किसी पूर्ण वस्तु के हिस्से को दर्शाता है।

 

उदाहरण: 3/5 में 3 अंश और 5 हर है।

 

भिन्नों का जोड़

 

समान हर होने पर अंशों को जोड़ें।

 

2/7 + 3/7 = 5/7

 

अलग-अलग हर होने पर पहले LCM निकालें।

 

भिन्नों का गुणा

 

अंश को अंश से और हर को हर से गुणा करें।

 

2/3 × 4/5 = 8/15

 


 

 

5. दशमलव (Decimal)

 

दशमलव संख्या में पूर्ण संख्या के बाद दशमलव बिंदु लगाया जाता है।

 

उदाहरण:

 

0.5 = 5/10 = 1/2

 

0.25 = 25/100 = 1/4

 

दशमलव को भिन्न में बदलने के लिए दशमलव स्थानों के अनुसार 10, 100, 1000 आदि का प्रयोग किया जाता है।

 


 

 

6. प्रतिशत (Percentage)

 

प्रतिशत का अर्थ है प्रति सौ।

 

प्रतिशत = (प्राप्त मान / कुल मान) × 100

 

उदाहरण:

 

एक परीक्षा में 500 में से 400 अंक मिले।

 

प्रतिशत = (400/500) × 100

 

= 80%

 

महत्वपूर्ण प्रतिशत

 

50% = 1/2

 

25% = 1/4

 

20% = 1/5

 

10% = 1/10

 

12.5% = 1/8

 

33⅓% = 1/3

 

66⅔% = 2/3

 


 

 

7. लाभ और हानि (Profit and Loss)

 

जब किसी वस्तु को खरीद मूल्य से अधिक पर बेचा जाता है तो लाभ होता है।

 

जब वस्तु को खरीद मूल्य से कम पर बेचा जाता है तो हानि होती है।

 

लाभ

 

लाभ = विक्रय मूल्य − क्रय मूल्य

 

हानि

 

हानि = क्रय मूल्य − विक्रय मूल्य

 

लाभ प्रतिशत

 

लाभ% = (लाभ / क्रय मूल्य) × 100

 

हानि प्रतिशत

 

हानि% = (हानि / क्रय मूल्य) × 100

 

उदाहरण:

 

किसी वस्तु का क्रय मूल्य ₹500 और विक्रय मूल्य ₹600 है।

 

लाभ = 600 − 500 = ₹100

 

लाभ% = 100/500 × 100 = 20%

 


 

 

8. छूट (Discount)

 

वस्तु के अंकित मूल्य पर दी जाने वाली कमी को छूट कहते हैं।

 

छूट = अंकित मूल्य − विक्रय मूल्य

 

छूट% = (छूट / अंकित मूल्य) × 100

 

उदाहरण:

 

किसी वस्तु का अंकित मूल्य ₹1000 है और 10% छूट दी गई।

 

छूट = ₹100

 

विक्रय मूल्य = ₹900

 


 

 

9. साधारण ब्याज (Simple Interest)

 

किसी धनराशि पर निश्चित दर से मिलने वाले ब्याज को साधारण ब्याज कहते हैं।

 

SI = (P × R × T)/100

 

जहाँ:

 

P = मूलधन

 

R = ब्याज दर

 

T = समय

 

कुल राशि

 

Amount = Principal + Simple Interest

 

उदाहरण:

 

₹5000 पर 2 वर्ष के लिए 10% वार्षिक ब्याज:

 

SI = 5000 × 10 × 2 / 100

 

= ₹1000

 

कुल राशि = ₹6000

 


 

10. चक्रवृद्धि ब्याज (Compound Interest)

 

चक्रवृद्धि ब्याज में पहले प्राप्त ब्याज को भी अगले समय के लिए मूलधन में जोड़ दिया जाता है।

 

वार्षिक चक्रवृद्धि के लिए:

 

A = P(1 + R/100)^T

 

और

 

CI = A − P

 

जहाँ A कुल राशि है।

 

चक्रवृद्धि ब्याज में समय के साथ ब्याज पर भी ब्याज मिलता है।

 


 

11. औसत (Average)

 

कई संख्याओं के योग को उन संख्याओं की कुल संख्या से भाग देने पर औसत प्राप्त होता है।

 

औसत = संख्याओं का योग / संख्याओं की संख्या

 

उदाहरण:

 

10, 20, 30, 40 और 50 का औसत:

 

योग = 150

 

संख्या = 5

 

औसत = 150/5 = 30

 


 

 

12. अनुपात और समानुपात

 

दो राशियों की तुलना अनुपात द्वारा की जाती है।

 

उदाहरण:

 

20 और 30 का अनुपात:

 

20:30 = 2:3

 

यदि दो अनुपात बराबर हों तो समानुपात कहलाता है।

 

उदाहरण:

 

2:3 = 4:6

 


 

 

13. समय और कार्य (Time and Work)

 

यदि कोई व्यक्ति किसी कार्य को निश्चित समय में पूरा करता है तो उसकी कार्य क्षमता निकाली जा सकती है।

 

यदि A किसी कार्य को 10 दिनों में पूरा करता है, तो A का एक दिन का कार्य:

 

1/10

 

यदि B वही कार्य 20 दिनों में करता है:

 

1/20

 

दोनों का एक दिन का कार्य:

 

1/10 + 1/20

 

= 3/20

 

इसलिए दोनों मिलकर पूरा कार्य:

 

20/3 दिन में करेंगे।

 


 

 

14. समय, दूरी और चाल

 

गणित में गति से संबंधित प्रश्नों के लिए तीन मुख्य सूत्र याद रखें:

 

चाल = दूरी / समय

 

दूरी = चाल × समय

 

समय = दूरी / चाल

 

उदाहरण:

 

एक कार 60 km/h की गति से 3 घंटे चलती है।

 

दूरी = 60 × 3 = 180 km

 

इकाई परिवर्तन

 

1 km = 1000 m

 

1 hour = 60 minutes

 

1 minute = 60 seconds

 

km/h को m/s में बदलने के लिए 5/18 से गुणा करें।

 

m/s को km/h में बदलने के लिए 18/5 से गुणा करें।

 


 

15. नाव और धारा

 

नाव की गति और धारा से संबंधित प्रश्नों में:

 

धारा के अनुकूल चाल = नाव की चाल + धारा की चाल

 

धारा के प्रतिकूल चाल = नाव की चाल − धारा की चाल

 

यदि अनुकूल और प्रतिकूल चाल दी हो तो:

 

नाव की चाल = (अनुकूल चाल + प्रतिकूल चाल)/2

 

धारा की चाल = (अनुकूल चाल − प्रतिकूल चाल)/2

 


 

 

16. रेलगाड़ी से संबंधित प्रश्न

 

जब ट्रेन किसी खंभे को पार करती है:

 

समय = ट्रेन की लंबाई / ट्रेन की चाल

 

जब ट्रेन किसी प्लेटफॉर्म को पार करती है:

 

समय = (ट्रेन की लंबाई + प्लेटफॉर्म की लंबाई) / ट्रेन की चाल

 

ध्यान रखें कि लंबाई और चाल की इकाइयाँ समान होनी चाहिए।

 


 

17. क्षेत्रमिति (Mensuration)

 

क्षेत्रमिति में विभिन्न आकृतियों के क्षेत्रफल, परिमाप और आयतन का अध्ययन किया जाता है।

 

वर्ग

 

यदि भुजा = a

 

परिमाप = 4a

 

क्षेत्रफल = a²

 

आयत

 

लंबाई = l और चौड़ाई = b

 

परिमाप = 2(l+b)

 

क्षेत्रफल = l × b

 

त्रिभुज

 

क्षेत्रफल = 1/2 × आधार × ऊँचाई

 

वृत्त

 

त्रिज्या = r

 

परिधि = 2πr

 

क्षेत्रफल = πr²

 

जहाँ π का मान सामान्यतः 22/7 या 3.14 लिया जाता है।

 


 

18. घन और घनाभ

 

घन

 

भुजा = a

 

आयतन = a³

 

कुल पृष्ठीय क्षेत्रफल = 6a²

 

घनाभ

 

लंबाई = l

 

चौड़ाई = b

 

ऊँचाई = h

 

आयतन = lbh

 

कुल पृष्ठीय क्षेत्रफल = 2(lb + bh + hl)

 


 

19. बीजगणित (Algebra)

 

बीजगणित में अज्ञात राशियों को अक्षरों द्वारा दर्शाया जाता है।

 

उदाहरण:

 

x + 5 = 10

 

इसलिए:

 

x = 5

 

महत्वपूर्ण सर्वसमिकाएँ

 

(a+b)² = a² + 2ab + b²

 

(a-b)² = a² − 2ab + b²

 

a² − b² = (a+b)(a-b)

 

(a+b)³ = a³ + 3a²b + 3ab² + b³

 

(a-b)³ = a³ − 3a²b + 3ab² − b³

 

ये सर्वसमिकाएँ प्रतियोगी परीक्षाओं में बहुत उपयोगी हैं।

 


 

20. रेखागणित (Geometry)

 

ज्यामिति में बिंदु, रेखा, कोण और आकृतियों का अध्ययन किया जाता है।

 

कोण के प्रकार

 

न्यून कोण: 90° से कम

 

समकोण: 90°

 

अधिक कोण: 90° से अधिक और 180° से कम

 

सरल कोण: 180°

 

पूर्ण कोण: 360°

 

त्रिभुज

 

त्रिभुज के तीनों कोणों का योग हमेशा:

 

180°

 

चतुर्भुज

 

चतुर्भुज के चारों कोणों का योग:

 

360°

 


 

21. पाइथागोरस प्रमेय

 

समकोण त्रिभुज में:

 

कर्ण² = आधार² + लंब²

 

यदि आधार 3 और लंब 4 है:

 

कर्ण² = 3² + 4²

 

= 9 + 16

 

= 25

 

इसलिए कर्ण = 5

 

इससे 3, 4, 5 एक प्रसिद्ध पाइथागोरस त्रिक है।

 


 

22. त्रिकोणमिति (Trigonometry)

 

त्रिकोणमिति में त्रिभुज की भुजाओं और कोणों के बीच संबंध का अध्ययन किया जाता है।

 

मुख्य अनुपात:

 

sin θ = लंब / कर्ण

 

cos θ = आधार / कर्ण

 

tan θ = लंब / आधार

 

महत्वपूर्ण संबंध:

 

tan θ = sin θ / cos θ

 

और

 

sin²θ + cos²θ = 1

 


 

23. आँकड़े (Data Interpretation)

 

डेटा इंटरप्रिटेशन में तालिका, ग्राफ, चार्ट या आंकड़ों के आधार पर प्रश्न पूछे जाते हैं।

 

मुख्य गणनाएँ:

 

– प्रतिशत

– अनुपात

– औसत

– अंतर

– कुल योग

– वृद्धि और कमी

 

प्रश्न हल करते समय पहले पूरे डेटा को ध्यान से पढ़ना चाहिए और उसके बाद आवश्यक गणना करनी चाहिए।

 


 

24. सरलीकरण (Simplification)

 

सरलीकरण में गणितीय अभिव्यक्ति को आसान रूप में बदला जाता है।

 

इसके लिए BODMAS नियम महत्वपूर्ण है:

 

B – Bracket

 

O – Of/Orders

 

D – Division

 

M – Multiplication

 

A – Addition

 

S – Subtraction

 

उदाहरण:

 

10 + 5 × 2

 

पहले गुणा:

 

5 × 2 = 10

 

फिर जोड़:

 

10 + 10 = 20

 

अतः उत्तर 20 होगा।

 


 

25. घातांक और करणी

 

घातांक के नियम

 

aᵐ × aⁿ = aᵐ⁺ⁿ

 

aᵐ ÷ aⁿ = aᵐ⁻ⁿ

 

(aᵐ)ⁿ = aᵐⁿ

 

a⁰ = 1, जहाँ a ≠ 0

 

करणी

 

√a × √b = √ab

 

√a / √b = √(a/b)

 

उदाहरण:

 

√25 = 5

 

√36 = 6

 


 

26. मिश्रण (Mixture)

 

मिश्रण से संबंधित प्रश्नों में दो या अधिक पदार्थों को अलग-अलग मात्रा या कीमत पर मिलाया जाता है।

 

ऐसे प्रश्नों में औसत कीमत, अनुपात और अंतर का प्रयोग किया जाता है।

 

उदाहरण:

 

यदि ₹20 और ₹30 प्रति किलो की वस्तुओं को मिलाया जाए, तो मिश्रण की औसत कीमत दोनों की मात्रा पर निर्भर करेगी।

 


 

27. उम्र से संबंधित प्रश्न

 

उम्र के प्रश्नों में वर्तमान उम्र को x मानकर समीकरण बनाया जा सकता है।

 

उदाहरण:

 

यदि पिता की उम्र पुत्र की उम्र से 20 वर्ष अधिक है और पुत्र की उम्र x है, तो पिता की उम्र:

 

x + 20

 

होगी।

 

कुछ वर्षों बाद दोनों की उम्र में अंतर समान रहता है।

 


 

28. साझेदारी (Partnership)

 

व्यापार में लाभ का बँटवारा सामान्यतः निवेश और समय के अनुपात में किया जाता है।

 

लाभ का अनुपात = पूँजी × समय का अनुपात

 

यदि A ने ₹10,000 छह महीने के लिए और B ने ₹20,000 तीन महीने के लिए लगाए:

 

A का निवेश = 10,000 × 6 = 60,000

 

B का निवेश = 20,000 × 3 = 60,000

 

इसलिए लाभ का अनुपात:

 

1 : 1

 


 

29. क्रमचय और संचय

 

क्रमचय (Permutation) में वस्तुओं की व्यवस्था महत्वपूर्ण होती है।

 

संचय (Combination) में चयन महत्वपूर्ण होता है।

 

क्रमचय:

 

nPr = n!/(n-r)!

 

संचय:

 

nCr = n!/[r!(n-r)!]

 

यह विषय उच्च स्तर की प्रतियोगी परीक्षाओं में विशेष रूप से उपयोगी है।

 


 

30. गणित की तैयारी कैसे करें?

 

गणित में अच्छे अंक प्राप्त करने के लिए नियमित अभ्यास सबसे महत्वपूर्ण है।

 

सबसे पहले मूलभूत अध्यायों को मजबूत करें:

 

1. संख्या पद्धति

2. प्रतिशत

3. लाभ-हानि

4. औसत

5. अनुपात

6. समय और कार्य

7. समय, दूरी और चाल

8. साधारण एवं चक्रवृद्धि ब्याज

9. क्षेत्रमिति

10. बीजगणित

11. ज्यामिति

12. त्रिकोणमिति

 

हर अध्याय के सूत्रों की अलग सूची बनाकर रोज दोहराएँ। इसके बाद पिछले वर्षों के प्रश्नों को हल करें। शुरुआत में गति से अधिक सही उत्तर पर ध्यान दें। अभ्यास बढ़ने के साथ गणना की गति भी बढ़ने लगेगी।

 


 

महत्वपूर्ण गणितीय सूत्र – Quick Revision

 

प्रतिशत = (भाग/कुल) × 100

 

लाभ = SP − CP

 

हानि = CP − SP

 

लाभ% = लाभ/CP × 100

 

हानि% = हानि/CP × 100

 

SI = PRT/100

 

औसत = कुल योग/कुल संख्या

 

चाल = दूरी/समय

 

दूरी = चाल × समय

 

समय = दूरी/चाल

 

आयत का क्षेत्रफल = लंबाई × चौड़ाई

 

वर्ग का क्षेत्रफल = भुजा²

 

त्रिभुज का क्षेत्रफल = 1/2 × आधार × ऊँचाई

 

वृत्त का क्षेत्रफल = πr²

 

वृत्त की परिधि = 2πr

 

घन का आयतन = a³

 

घनाभ का आयतन = lbh

 

HCF × LCM = दो संख्याओं का गुणनफल

 

(a+b)² = a² + 2ab + b²

 

(a-b)² = a² − 2ab + b²

 

a² − b² = (a+b)(a-b)

 

sin θ = लंब/कर्ण

 

cos θ = आधार/कर्ण

 

tan θ = लंब/आधार

 


 

निष्कर्ष

गणित एक अभ्यास आधारित विषय है। इसमें जितना अधिक प्रश्नों का अभ्यास किया जाता है, उतनी ही तेजी और शुद्धता बढ़ती है। केवल सूत्र याद करने के बजाय यह समझना जरूरी है कि किसी प्रश्न में कौन-सा सूत्र और किस प्रकार प्रयोग करना है।

 

प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले विद्यार्थियों को पहले गणित की मूल अवधारणाओं को समझना चाहिए और उसके बाद अध्यायवार प्रश्नों का अभ्यास करना चाहिए। रोजाना कुछ समय गणित के लिए निर्धारित करके नियमित अभ्यास करने से कठिन प्रश्न भी धीरे-धीरे आसान लगने लगते हैं।

 

याद रखें: गणित में सफलता का सबसे बड़ा मंत्र है—Concept + Formula + Practice + Speed + Accuracy.

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