
भारत की मेजबानी में नई दिल्ली में शनिवार से आयोजित दो दिवसीय 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग, रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, ब्राजील के विदेश मंत्री माउरो विएरा, यूएई की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए सुप्रीम काउंसिल के सेक्रेटरी-जनरल अली मोहम्मद हम्माद अल शम्सी, इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्राबोवो सुबियांतो, मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फत्ताह अल-सीसी, दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामफोसा, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान और इथियोपिया के प्रधानमंत्री अबिय अहमद समेत सदस्य देशों के नेताओं ने हिस्सा लिया और ग्रुप फोटो खिंचवाई। विदेशी मीडिया इस जुटान को वैश्विक व्यवस्था (वर्ल्ड आर्डर) में बदलाव और बदलते समीकरणों की झलक के रूप में देख रहा है; अमेरिकी अखबार न्यूयॉर्क टाइम्स ने लिखा कि सम्मेलन का सबसे अहम सवाल यह है कि पीएम मोदी और शी चिनफिंग में से कौन विकासशील दुनिया की अधिक प्रभावशाली आवाज बनकर उभरेगा, साथ ही युद्ध, ऊर्जा की बढ़ती कीमतें, अमेरिकी टैरिफ और एआई की चिंताएं देशों को वाशिंगटन व बीजिंग के साथ रिश्तों पर पुनर्विचार के लिए मजबूर कर रही हैं। वहीं, वॉल स्ट्रीट जर्नल के अनुसार अमेरिका के साथ संबंधों की अनिश्चितता ने इन दोनों परमाणु संपन्न पड़ोसियों को आपसी तनाव कम करने का अवसर दिया है।
‘भारत घर जैसा लगता है, यहां मिला अपनापन’ कहते हुए सम्मेलन को कवर करने आए विदेशी पत्रकारों ने भारत के आतिथ्य सत्कार और संस्कृति की भूरी-भूरी प्रशंसा की; टीवी ब्रिक्स अफ्रीका की मेलिसा हालो ने अपने पहले भारत दौरे, स्थानीय मंदिरों के दर्शन व शांति के अनुभव को खूबसूरत बताते हुए यहां के लोगों को बेहद मददगार बताया, जबकि शाद्रक हालो ने तंदूरी चिकन सहित भारतीय व्यंजनों की तारीफ की।

