स्वतंत्रता के बाद भारत का इतिहास –
प्रस्तावना
भारत ने 15 अगस्त 1947 को लगभग दो शताब्दियों के ब्रिटिश शासन से स्वतंत्रता प्राप्त की। स्वतंत्रता भारत के इतिहास की एक महान उपलब्धि थी, लेकिन स्वतंत्रता के साथ देश के सामने अनेक गंभीर चुनौतियाँ भी थीं। भारत का विभाजन हो चुका था, लाखों लोग विस्थापित हो चुके थे, सांप्रदायिक हिंसा की स्थिति थी और देश की आर्थिक एवं सामाजिक स्थिति काफी कमजोर थी।
स्वतंत्रता के बाद भारत के सामने सबसे बड़ी चुनौती एक मजबूत, लोकतांत्रिक और एकीकृत राष्ट्र का निर्माण करना था। देशी रियासतों का भारत में विलय, संविधान का निर्माण, लोकतांत्रिक चुनावों की शुरुआत, आर्थिक विकास, कृषि सुधार, औद्योगिकीकरण और राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे अनेक क्षेत्रों में महत्वपूर्ण कदम उठाए गए।
इस भाग में हम 1947 से 1971 तक स्वतंत्र भारत के इतिहास की प्रमुख घटनाओं और विकास को विस्तार से समझेंगे।
1. भारत की स्वतंत्रता और विभाजन
15 अगस्त 1947 को भारत स्वतंत्र हुआ। पंडित जवाहरलाल नेहरू स्वतंत्र भारत के प्रथम प्रधानमंत्री बने।
भारत की स्वतंत्रता के साथ ही देश का विभाजन भारत और पाकिस्तान के रूप में हुआ। विभाजन के कारण करोड़ों लोगों का जीवन प्रभावित हुआ। बड़ी संख्या में लोगों को अपना घर और संपत्ति छोड़कर भारत या पाकिस्तान जाना पड़ा।
विभाजन के दौरान कई क्षेत्रों में सांप्रदायिक हिंसा हुई। शरणार्थियों के पुनर्वास की जिम्मेदारी नवगठित भारतीय सरकार के सामने एक बड़ी चुनौती थी।
स्वतंत्रता के समय भारत की प्रमुख समस्याएँ थीं—
• देश का विभाजन और शरणार्थियों का पुनर्वास
• सांप्रदायिक हिंसा
• देशी रियासतों का एकीकरण
• गरीबी और बेरोजगारी
• अशिक्षा
• खाद्यान्न की कमी
• कमजोर औद्योगिक आधार
• आर्थिक विकास की चुनौती
• राष्ट्रीय एकता और सुरक्षा
इन परिस्थितियों के बावजूद भारत ने लोकतांत्रिक व्यवस्था को अपनाने का निर्णय लिया।
2. देशी रियासतों का भारत में एकीकरण
स्वतंत्रता के समय भारत में ब्रिटिश शासन वाले क्षेत्रों के अलावा बड़ी संख्या में देशी रियासतें थीं। इन रियासतों पर अलग-अलग शासकों का शासन था।
स्वतंत्र भारत की राजनीतिक एकता के लिए इन रियासतों का भारतीय संघ में विलय अत्यंत आवश्यक था।
इस कार्य में भारत के प्रथम उपप्रधानमंत्री और गृहमंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल तथा उनके सहयोगी वी. पी. मेनन की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
अधिकांश रियासतों ने भारत में शामिल होने की सहमति दे दी। हालांकि कुछ रियासतों के विलय में कठिनाइयाँ उत्पन्न हुईं।
जूनागढ़ का विलय
जूनागढ़ के शासक ने पाकिस्तान में शामिल होने का निर्णय लिया, जबकि वहाँ की अधिकांश जनता भारत के साथ रहना चाहती थी।
बाद में राजनीतिक परिस्थितियों और जनमत के आधार पर जूनागढ़ भारत का हिस्सा बना।
हैदराबाद का विलय
हैदराबाद के निजाम स्वतंत्र रहना चाहते थे। भारत सरकार ने सितंबर 1948 में सैन्य कार्रवाई की, जिसे ऑपरेशन पोलो कहा जाता है।
इसके बाद हैदराबाद का भारतीय संघ में विलय हो गया।
जम्मू-कश्मीर का भारत में विलय
जम्मू-कश्मीर के महाराजा हरि सिंह ने प्रारंभ में भारत और पाकिस्तान दोनों से अलग रहने की कोशिश की।
1947 में पाकिस्तान समर्थित कबायली आक्रमण के बाद महाराजा हरि सिंह ने भारत से सहायता मांगी और भारत में विलय के दस्तावेज पर हस्ताक्षर किए।
इसके बाद भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध हुआ।
रियासतों के एकीकरण ने भारत की राजनीतिक एकता को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
3. महात्मा गांधी की हत्या
30 जनवरी 1948 को नई दिल्ली में महात्मा गांधी की हत्या कर दी गई।
महात्मा गांधी स्वतंत्रता आंदोलन के प्रमुख नेताओं में से एक थे और उन्होंने अहिंसा तथा सत्याग्रह के माध्यम से भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन को नई दिशा दी थी।
उनकी हत्या स्वतंत्र भारत के लिए एक अत्यंत दुखद घटना थी।
गांधी जी की मृत्यु के बाद देश में शांति और सांप्रदायिक सद्भाव बनाए रखने के प्रयास किए गए।
4. भारतीय संविधान का निर्माण
स्वतंत्र भारत को एक ऐसी शासन व्यवस्था की आवश्यकता थी जो देश के राजनीतिक और सामाजिक जीवन का आधार बन सके।
भारत की संविधान सभा ने संविधान का निर्माण किया।
संविधान सभा के अध्यक्ष डॉ. राजेंद्र प्रसाद थे।
संविधान की प्रारूप समिति के अध्यक्ष डॉ. भीमराव आंबेडकर थे।
भारतीय संविधान को 26 नवंबर 1949 को अपनाया गया।
इसके बाद 26 जनवरी 1950 को संविधान लागू हुआ और भारत एक गणराज्य बन गया।
26 जनवरी को गणतंत्र दिवस के रूप में मनाया जाता है।
भारतीय संविधान ने नागरिकों को मौलिक अधिकार प्रदान किए और लोकतांत्रिक शासन की नींव रखी।
5. भारत के प्रथम राष्ट्रपति
26 जनवरी 1950 को डॉ. राजेंद्र प्रसाद भारत के प्रथम राष्ट्रपति बने।
वे संविधान सभा के अध्यक्ष भी थे।
उन्होंने 1950 से 1962 तक भारत के राष्ट्रपति के रूप में कार्य किया।
वे भारत के एकमात्र ऐसे राष्ट्रपति रहे जिन्हें लगातार दो बार राष्ट्रपति चुना गया।
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6. भारत के प्रथम आम चुनाव
स्वतंत्र भारत का पहला आम चुनाव 1951-52 में हुआ।
यह भारत के लोकतांत्रिक इतिहास की एक महत्वपूर्ण घटना थी।
उस समय भारत में बड़ी संख्या में लोग अशिक्षित थे और देश में चुनाव कराने का अनुभव भी बहुत कम था। इसके बावजूद भारत ने सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार के आधार पर चुनाव कराया।
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने पहले आम चुनाव में बड़ी सफलता प्राप्त की और जवाहरलाल नेहरू प्रधानमंत्री बने।
पहले आम चुनाव ने दुनिया के सामने भारत की लोकतांत्रिक प्रतिबद्धता को प्रदर्शित किया।
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7. जवाहरलाल नेहरू का प्रधानमंत्री काल
जवाहरलाल नेहरू स्वतंत्र भारत के प्रथम प्रधानमंत्री थे। उन्होंने 15 अगस्त 1947 से मई 1964 तक देश का नेतृत्व किया।
उनके कार्यकाल में लोकतांत्रिक संस्थाओं को मजबूत करने, औद्योगिकीकरण, वैज्ञानिक विकास और आर्थिक नियोजन पर विशेष जोर दिया गया।
नेहरू आधुनिक भारत के निर्माण के लिए विज्ञान और तकनीक को महत्वपूर्ण मानते थे।
उनके कार्यकाल में कई बड़े बाँध, सार्वजनिक क्षेत्र के उद्योग, वैज्ञानिक संस्थान और उच्च शिक्षा संस्थान विकसित किए गए।
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8. पंचवर्षीय योजनाओं की शुरुआत
भारत ने आर्थिक विकास के लिए नियोजित अर्थव्यवस्था का मॉडल अपनाया।
1951 में प्रथम पंचवर्षीय योजना शुरू की गई।
प्रथम पंचवर्षीय योजना
प्रथम पंचवर्षीय योजना 1951 से 1956 तक चली।
इस योजना में मुख्य रूप से कृषि, सिंचाई और ग्रामीण विकास पर जोर दिया गया।
देश में खाद्यान्न उत्पादन बढ़ाना और कृषि व्यवस्था को मजबूत करना प्रमुख उद्देश्य था।
द्वितीय पंचवर्षीय योजना
द्वितीय पंचवर्षीय योजना 1956 में शुरू हुई।
इस योजना में भारी उद्योगों और औद्योगिकीकरण पर विशेष ध्यान दिया गया।
इस योजना के निर्माण में अर्थशास्त्री पी. सी. महालनोबिस की महत्वपूर्ण भूमिका थी
भारत में इस समय सार्वजनिक क्षेत्र के बड़े उद्योगों को बढ़ावा दिया गया।
9. औद्योगिकीकरण और सार्वजनिक क्षेत्र
स्वतंत्रता के समय भारत का औद्योगिक आधार सीमित था।
सरकार ने देश को औद्योगिक रूप से मजबूत बनाने के लिए सार्वजनिक क्षेत्र के उद्योगों को बढ़ावा दिया।
इस दौर में इस्पात, भारी मशीनरी, ऊर्जा, खनन और इंजीनियरिंग जैसे क्षेत्रों में बड़े संस्थान और उद्योग विकसित किए गए।
भिलाई, राउरकेला और दुर्गापुर जैसे प्रमुख इस्पात संयंत्रों का विकास इसी औद्योगिक नीति का हिस्सा था।
10. वैज्ञानिक एवं तकनीकी विकास
स्वतंत्रता के बाद भारत ने विज्ञान और तकनीक को राष्ट्रीय विकास का महत्वपूर्ण आधार बनाया।
वैज्ञानिक अनुसंधान संस्थानों का विस्तार किया गया।
परमाणु ऊर्जा, अंतरिक्ष अनुसंधान, इंजीनियरिंग और उच्च शिक्षा के क्षेत्र में संस्थागत विकास शुरू हुआ।
होमी जहांगीर भाभा ने भारत के परमाणु कार्यक्रम के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
भारत में वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करने को भी महत्व दिया गया।
11. गुटनिरपेक्ष विदेश नीति
शीत युद्ध के समय दुनिया मुख्य रूप से दो प्रमुख शक्ति गुटों में विभाजित थी।
एक ओर अमेरिका के नेतृत्व वाला पश्चिमी गुट था और दूसरी ओर सोवियत संघ के नेतृत्व वाला गुट।
भारत ने किसी सैन्य गुट में शामिल होने के बजाय स्वतंत्र विदेश नीति अपनाने की कोशिश की।
जवाहरलाल नेहरू गुटनिरपेक्ष नीति के प्रमुख समर्थकों में थे।
भारत ने एशिया और अफ्रीका के नवस्वतंत्र देशों के साथ सहयोग बढ़ाने की नीति अपनाई।
बाद में गुटनिरपेक्ष आंदोलन एक महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय मंच के रूप में विकसित हुआ।
12. राज्यों का पुनर्गठन
स्वतंत्रता के बाद भारत में राज्यों की सीमाओं को लेकर कई मांगें उठीं।
विशेष रूप से भाषा के आधार पर राज्यों के गठन की मांग तेज हुई।
1953 में आंध्र राज्य का गठन हुआ।
इसके बाद राज्यों की सीमाओं और प्रशासनिक व्यवस्था का अध्ययन करने के लिए राज्य पुनर्गठन आयोग का गठन किया गया।
1956 में राज्य पुनर्गठन अधिनियम लागू हुआ।
इसके माध्यम से भारत के राज्यों की सीमाओं में बड़े परिवर्तन किए गए।
भाषाई और प्रशासनिक आधार पर राज्यों का पुनर्गठन भारतीय संघ को व्यवस्थित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम था।
13. पंचायती राज व्यवस्था
स्वतंत्र भारत में ग्रामीण क्षेत्रों में स्थानीय लोकतंत्र को मजबूत करने की आवश्यकता महसूस की गई।
1957 में बलवंत राय मेहता समिति ने लोकतांत्रिक विकेंद्रीकरण और पंचायती राज से संबंधित महत्वपूर्ण सुझाव दिए।
इसके बाद विभिन्न राज्यों में पंचायती राज संस्थाओं के विकास की प्रक्रिया शुरू हुई।
आगे चलकर 73वें संविधान संशोधन के माध्यम से पंचायती राज संस्थाओं को संवैधानिक दर्जा मिला।
14. भारत और चीन के संबंध
स्वतंत्रता के शुरुआती वर्षों में भारत और चीन के संबंधों को बेहतर बनाने की कोशिश की गई।
भारत ने पंचशील के सिद्धांतों पर जोर दिया।
1954 में भारत और चीन के बीच पंचशील समझौता हुआ।
पंचशील के प्रमुख सिद्धांतों में एक-दूसरे की क्षेत्रीय अखंडता और संप्रभुता का सम्मान, परस्पर अनाक्रमण, आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप न करना, समानता एवं पारस्परिक लाभ और शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व शामिल थे।
हालाँकि बाद में दोनों देशों के बीच सीमा विवाद गंभीर हो गया।
15. 1962 का भारत-चीन युद्ध
भारत और चीन के बीच सीमा विवाद बढ़ता गया।
अक्टूबर 1962 में दोनों देशों के बीच युद्ध हुआ।
इस युद्ध में भारत को सैन्य कठिनाइयों का सामना करना पड़ा।
युद्ध के बाद भारत ने अपनी रक्षा व्यवस्था को मजबूत करने पर अधिक ध्यान दिया।
इस घटना ने भारतीय विदेश नीति और राष्ट्रीय सुरक्षा नीति को भी प्रभावित किया।
16. गोवा मुक्ति
स्वतंत्रता के बाद भी गोवा, दमन और दीव पुर्तगाली शासन के अधीन थे।
भारत सरकार ने लंबे समय तक शांतिपूर्ण समाधान का प्रयास किया।
दिसंबर 1961 में भारतीय सेना ने सैन्य कार्रवाई की और पुर्तगाली शासन का अंत हुआ।
इस कार्रवाई के बाद गोवा, दमन और दीव भारत का हिस्सा बने।
गोवा की मुक्ति स्वतंत्र भारत के राजनीतिक एकीकरण की महत्वपूर्ण घटनाओं में शामिल है।
17. जवाहरलाल नेहरू का निधन
27 मई 1964 को जवाहरलाल नेहरू का निधन हुआ।
वे स्वतंत्र भारत के पहले प्रधानमंत्री थे और उन्होंने लगभग 17 वर्षों तक देश का नेतृत्व किया।
उनके बाद लाल बहादुर शास्त्री भारत के प्रधानमंत्री बने।
18. लाल बहादुर शास्त्री का प्रधानमंत्री काल
लाल बहादुर शास्त्री 1964 में भारत के प्रधानमंत्री बने।
उनका कार्यकाल छोटा था, लेकिन इस दौरान देश को गंभीर चुनौतियों का सामना करना पड़ा।
भारत को खाद्यान्न की कमी और आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा था।
शास्त्री जी ने किसानों और सैनिकों के महत्व को रेखांकित करते हुए प्रसिद्ध नारा दिया—
“जय जवान, जय किसान।”
19. 1965 का भारत-पाकिस्तान युद्ध
1965 में भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध हुआ।
यह युद्ध मुख्य रूप से जम्मू-कश्मीर और पश्चिमी सीमा के क्षेत्रों में हुआ।
भारतीय सेना ने पाकिस्तान की सेनाओं का मुकाबला किया।
युद्ध के बाद दोनों देशों के बीच सोवियत संघ की मध्यस्थता में ताशकंद समझौता हुआ।
ताशकंद समझौता जनवरी 1966 में हुआ।
20. लाल बहादुर शास्त्री का निधन
10 जनवरी 1966 को लाल बहादुर शास्त्री और पाकिस्तान के राष्ट्रपति अयूब खान ने ताशकंद समझौते पर हस्ताक्षर किए।
11 जनवरी 1966 को ताशकंद में लाल बहादुर शास्त्री का निधन हो गया।
उनके निधन के बाद इंदिरा गांधी भारत की प्रधानमंत्री बनीं।
21. इंदिरा गांधी का प्रारंभिक प्रधानमंत्री काल
इंदिरा गांधी जनवरी 1966 में भारत की प्रधानमंत्री बनीं।
उनके सामने खाद्यान्न संकट, आर्थिक समस्याएँ और राजनीतिक चुनौतियाँ थीं।
सरकार ने कृषि उत्पादन बढ़ाने और अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए कई कदम उठाए।
इंदिरा गांधी के प्रधानमंत्री काल में भारत की राजनीति में बड़े परिवर्तन देखने को मिले।
22. हरित क्रांति
1960 के दशक में भारत खाद्यान्न की कमी की समस्या से जूझ रहा था।
देश को खाद्यान्न के लिए विदेशी आयात पर भी निर्भर रहना पड़ता था।
कृषि उत्पादन बढ़ाने के लिए आधुनिक कृषि तकनीकों का प्रयोग शुरू किया गया।
उच्च उपज वाली बीज किस्मों, सिंचाई, रासायनिक उर्वरकों, कीटनाशकों और आधुनिक कृषि पद्धतियों का उपयोग बढ़ाया गया।
इसे हरित क्रांति कहा गया।
भारत में हरित क्रांति से जुड़े प्रमुख वैज्ञानिकों में डॉ. एम. एस. स्वामीनाथन का महत्वपूर्ण योगदान माना जाता है।
हरित क्रांति के कारण विशेष रूप से गेहूँ और चावल के उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि हुई।
पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश जैसे क्षेत्रों में इसका प्रभाव विशेष रूप से देखा गया।
हरित क्रांति ने भारत को खाद्यान्न उत्पादन के क्षेत्र में अधिक आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
23. बैंकों का राष्ट्रीयकरण
19 जुलाई 1969 को भारत सरकार ने 14 प्रमुख वाणिज्यिक बैंकों का राष्ट्रीयकरण किया।
इसका उद्देश्य बैंकिंग सेवाओं का विस्तार करना और अर्थव्यवस्था के विकास में बैंकिंग क्षेत्र की भूमिका बढ़ाना था।
राष्ट्रीयकरण के बाद ग्रामीण क्षेत्रों और कृषि क्षेत्र तक बैंकिंग सेवाओं का विस्तार करने पर अधिक ध्यान दिया गया।
24. प्रिवी पर्स की समाप्ति
स्वतंत्रता के बाद देशी रियासतों के पूर्व शासकों को सरकार की ओर से कुछ विशेष भुगतान दिए जाते थे, जिन्हें प्रिवी पर्स कहा जाता था।
इंदिरा गांधी की सरकार ने प्रिवी पर्स की व्यवस्था समाप्त करने का प्रयास किया।
1971 में संविधान संशोधन के माध्यम से पूर्व रियासतों के शासकों को मिलने वाली यह व्यवस्था समाप्त कर दी गई।
25. 1971 का भारत-पाकिस्तान युद्ध
1971 में पूर्वी पाकिस्तान में राजनीतिक संकट और हिंसा की स्थिति उत्पन्न हुई।
पूर्वी पाकिस्तान से बड़ी संख्या में लोग भारत में शरण लेने लगे।
भारत पर शरणार्थियों का भारी दबाव पड़ा।
दिसंबर 1971 में भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध शुरू हुआ।
भारतीय सेना ने पूर्वी मोर्चे पर महत्वपूर्ण सैन्य सफलता प्राप्त की।
16 दिसंबर 1971 को पाकिस्तानी सेना ने ढाका में आत्मसमर्पण किया।
इसके परिणामस्वरूप पूर्वी पाकिस्तान स्वतंत्र होकर बांग्लादेश बना।
1971 का युद्ध स्वतंत्र भारत के इतिहास की सबसे महत्वपूर्ण घटनाओं में से एक माना जाता है।
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26. 1971 के युद्ध का महत्व
1971 के युद्ध के कई महत्वपूर्ण परिणाम हुए।
• बांग्लादेश एक स्वतंत्र राष्ट्र बना।
• पाकिस्तान का विभाजन हुआ।
• भारत की सैन्य क्षमता और क्षेत्रीय प्रभाव बढ़ा।
• दक्षिण एशिया की राजनीतिक स्थिति में बड़ा परिवर्तन आया।
• भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा नीति को नई दिशा मिली।
27. 1947 से 1971 तक की प्रमुख घटनाओं का कालक्रम
1947 – भारत स्वतंत्र हुआ और देश का विभाजन हुआ।
1948 – महात्मा गांधी की हत्या तथा हैदराबाद का भारत में विलय।
1950 – भारतीय संविधान लागू हुआ और भारत गणराज्य बना।
1951-52 – स्वतंत्र भारत का पहला आम चुनाव।
1951 – प्रथम पंचवर्षीय योजना की शुरुआत।
1956 – द्वितीय पंचवर्षीय योजना और राज्य पुनर्गठन अधिनियम।
1961 – गोवा का भारत में विलय।
1962 – भारत-चीन युद्ध।
1964 – जवाहरलाल नेहरू का निधन।
1965 – भारत-पाकिस्तान युद्ध।
1966 – लाल बहादुर शास्त्री का निधन और इंदिरा गांधी प्रधानमंत्री बनीं।
1969 – 14 प्रमुख बैंकों का राष्ट्रीयकरण।
1971 – भारत-पाकिस्तान युद्ध और बांग्लादेश का निर्माण।
28. प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
प्रश्न: भारत स्वतंत्र कब हुआ?
उत्तर: 15 अगस्त 1947
प्रश्न: स्वतंत्र भारत के प्रथम प्रधानमंत्री कौन थे?
उत्तर: जवाहरलाल नेहरू
प्रश्न: भारत गणराज्य कब बना?
उत्तर: 26 जनवरी 1950
प्रश्न: भारत के प्रथम राष्ट्रपति कौन थे?
उत्तर: डॉ. राजेंद्र प्रसाद
प्रश्न: भारतीय संविधान कब लागू हुआ?
उत्तर: 26 जनवरी 1950
प्रश्न: भारतीय संविधान कब अपनाया गया?
उत्तर: 26 नवंबर 1949
प्रश्न: स्वतंत्र भारत का पहला आम चुनाव कब हुआ?
उत्तर: 1951-52
प्रश्न: प्रथम पंचवर्षीय योजना कब शुरू हुई?
उत्तर: 1951
प्रश्न: द्वितीय पंचवर्षीय योजना किस क्षेत्र पर अधिक केंद्रित थी?
उत्तर: भारी उद्योग और औद्योगिकीकरण
प्रश्न: राज्य पुनर्गठन अधिनियम कब लागू हुआ?
उत्तर: 1956
प्रश्न: भारत-चीन युद्ध कब हुआ?
उत्तर: 1962
प्रश्न: गोवा भारत का हिस्सा कब बना?
उत्तर: 1961
प्रश्न: 1965 के भारत-पाक युद्ध के समय भारत के प्रधानमंत्री कौन थे?
उत्तर: लाल बहादुर शास्त्री
प्रश्न: “जय जवान, जय किसान” का नारा किसने दिया?
उत्तर: लाल बहादुर शास्त्री
प्रश्न: हरित क्रांति से जुड़े प्रमुख भारतीय वैज्ञानिक कौन थे?
उत्तर: डॉ. एम. एस. स्वामीनाथन
प्रश्न: भारत में 14 प्रमुख बैंकों का राष्ट्रीयकरण कब हुआ?
उत्तर: 1969
प्रश्न: 1971 के युद्ध का प्रमुख परिणाम क्या था?
उत्तर: बांग्लादेश का निर्माण
प्रश्न: बांग्लादेश का निर्माण किस वर्ष हुआ?
उत्तर: 1971
निष्कर्ष
1947 से 1971 तक का समय स्वतंत्र भारत के निर्माण और राष्ट्रीय एकीकरण का महत्वपूर्ण दौर था। स्वतंत्रता के समय भारत के सामने विभाजन, शरणार्थी समस्या, रियासतों का एकीकरण, गरीबी, खाद्यान्न संकट और आर्थिक पिछड़ेपन जैसी अनेक चुनौतियाँ थीं।
भारत ने इन चुनौतियों के बीच लोकतांत्रिक संविधान अपनाया, चुनाव व्यवस्था स्थापित की और देशी रियासतों का एकीकरण किया। पंचवर्षीय योजनाओं के माध्यम से आर्थिक विकास की शुरुआत की गई और सार्वजनिक क्षेत्र तथा भारी उद्योगों को बढ़ावा दिया गया।
इस अवधि में भारत ने अपनी विदेश नीति को स्वतंत्र रूप से विकसित किया, राज्यों का पुनर्गठन किया, कृषि क्षेत्र में हरित क्रांति की शुरुआत की और अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत किया।
1971 का युद्ध और बांग्लादेश का निर्माण इस अवधि की एक महत्वपूर्ण घटना थी। इस प्रकार 1947 से 1971 तक का दौर आधुनिक भारत की राजनीतिक, आर्थिक, सामाजिक और रणनीतिक नींव तैयार करने वाला काल रहा।
